परमेश्वर की असीम अनुकम्पा से यह जीवन मिला, उसीके द्वारा निर्धारित मार्ग पर चलते हुुए जीवन यात्रा आगे बढ़ रही है। व्यक्ति तो मात्र निमित्त बनता है, मुझे प्रसन्नता है कि परमात्मा ने वह सब प्रदान किया, जिसकी अध्ययन काल में कल्पना करना भी कठिन था। गुरुकुल से प्रारम्भ हुुई सरस्वती की सेवा अध्यापनकाल में पी-एच. डी. के रूप में प्रथम सोपान को उपलब्ध हुई, कुछ समय व्यतीत होने पर यह क्रम डी.लिट्. के रूप में चला। अध्ययन का यह क्रम आगे बढ़ता हुआ गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के वैदिक शोधसंस्थान के प्रोफेसर पद तक पहुँचा। यहाँ आकर अनेक प्रकार के कार्य करने के अवसर मिले। प्रमुख रूप से वेद और उसके भाष्य, व्याकरण, उपनिषद् साहित्य आदि पर कार्य करते हुए लेखन और सम्पादन के रूप में अब तक 40 प्रकाशन आ चुके हैं। यह सब परमात्मा की अनुकम्पा का परिणाम है। अतः यह सब कार्य उसीको समर्पित है।